उत्तम ब्राह्मण की महिमा

ऊँ जन्मना ब्राम्हणो, ज्ञेय:संस्कारैर्द्विज उच्चते।
विद्यया याति विप्रत्वं, त्रिभि:श्रोत्रिय लक्षणम्।।

ब्राह्मण के बालक को जन्म से ही ब्राह्मण समझना चाहिए। संस्कारों से “द्विज” संज्ञा होती है तथा विद्याध्ययन से “विप्र” नाम धारण करता है।
जो वेद,मन्त्र तथा पुराणों से शुद्ध होकर तीर्थस्नानादि के कारण और भी पवित्र हो गया है, वह ब्राह्मण परम पूजनीय माना गया है। पढ़ना जारी रखे उत्तम ब्राह्मण की महिमा

काल का रहस्य

क्या है काल ?
सर्वाहारी ? सर्वभक्षी ? मानवातीत, देवातीत ? अभेद्य, दुर्जय और निरंकुश ?
क्या है यह ? क्यों है यह ? किसके लिए है यह ? कैसा है यह ? कब से है यह ? कब तक रहेगा यह ? पढ़ना जारी रखे काल का रहस्य

सनातन धर्म में अवतारों के प्रकार

यूँ तो अवतार लेने का कार्य दो तत्व करते हैं। एक भगवान, दूसरे जीव। यहाँ देखना यह है कि भगवान का अवतार स्वयं की इच्छा से होता है। और जीवों का अवतार भगवान की इच्छा से। पढ़ना जारी रखे सनातन धर्म में अवतारों के प्रकार

रामचरितमानस से मन्त्र लाभ

गोस्वामी तुलसीदास जी ने हनुमान जी की आज्ञा से शुरू में संस्कृत में ही रामकथा का वर्णन करना प्रारंभ किया था। लेकिन शिव जी ने स्वप्न में कहा कि कलियुग में संस्कृत को जानने वाले लोग कम होंगे। अतः तुम सुगम भाषा में लिखो। अतः उन्होंने ऐसा किया। पढ़ना जारी रखे रामचरितमानस से मन्त्र लाभ

अनेकात्म रहस्य

अक्सर लोग पूछते हैं कि सनातन ग्रंथों के अनुसार भगवती से विष्णु और विष्णु से भगवती उत्पन्न हुई हैं। ऐसे ही शिव से ये दोनों और इन दोनों से शिव हुए हैं। आदि आदि फिर इनमें श्रेष्ठ कौन। पढ़ना जारी रखे अनेकात्म रहस्य

पूजा अनुष्ठान हेतु सम्पर्क करें

मैंने गौर किया है कि मुझसे कई बार कई लोग एक विशेष प्रश्न पूछते हैं। उसका उत्तर मैं यहीं दे रहा हूँ। पढ़ना जारी रखे पूजा अनुष्ठान हेतु सम्पर्क करें

ब्राह्मण का महत्त्व

यह पोस्ट विभिन्न लोगों द्वारा पूछे गए प्रश्नों तथा मेरे द्वारा दिए गए उनके उत्तरों पर आधारित है। पढ़ना जारी रखे ब्राह्मण का महत्त्व

अन्य धर्मों का उद्भव

आज नीतीश मिश्र जी ने मुझसे एक प्रश्न किया‬:
आदरणीय भागवतानंद जी!
आप बहुत अच्छे विद्वान् हैं। कई दिनों से एक प्रश्न मेरे हृदय में उबाल ले रहा है यदि आप उसका निराकरण करेंगे तो अतिकृपा होगी। पढ़ना जारी रखे अन्य धर्मों का उद्भव

शङ्कराचार्य को समझें

आज किसी सज्जन ने कहा कि शंकराचार्य जी अरबपति बन कर बैठे हैं। कुछ करते धरते नहीं हैं। उन्हें मेरा उत्तर :-
यदि जगद्गुरु शंकराचार्य जी अरबपति हैं तो उन्हें होना भी चाहिए। वैसे भी वो संपत्ति पीठ की है, उनकी निजी नहीं, और न इसका उपयोग उनके निजी कार्य में हो रहा है। पढ़ना जारी रखे शङ्कराचार्य को समझें

वेद श्रुति को समझो

हर श्रुति के दो खण्ड होते हैं – मन्त्र भाग और ब्राह्मण भाग । श्रुति को समझने के लिए जिनकी जरूरत पड़ती है उन्हें भी विद्या कह दिया जाता है । श्रुतियों का अर्थ करने के लिये व्याकरण की बड़ी जरूरत होती है । पढ़ना जारी रखे वेद श्रुति को समझो