पूजा अनुष्ठान हेतु सम्पर्क करें

मैंने गौर किया है कि मुझसे कई बार कई लोग एक विशेष प्रश्न पूछते हैं। उसका उत्तर मैं यहीं दे रहा हूँ।

वेद के मन्त्र तीन भागों में बाँटें गए हैं। ज्ञानकाण्ड, उपासनाकाण्ड और कर्मकांड। कई बार इन तीनों में सम्मिश्रण भी हो जाता है। मैं वस्तुतः एक ज्ञानकाण्डी व्यक्तित्व वाला प्रवचनकर्ता हूँ। अब प्रश्न है कि किस ग्रन्थ या विषय पर प्रवचन करते हैं, कहाँ करते हैं, कितनी देर करते हैं ? तो इसका सीधा उत्तर है, कि मैं हर उस ग्रन्थ या विषय पर, हर उस स्थान पर तथा उतने समय तक प्रवचन कर सकता हूँ और करता हूँ जिस विषय, स्थान एवम् समयसीमा को आप चुनें।

लेकिन मैं एक दक्षिणपंथी तंत्र साधक होने से उपासनाकांडी भी हूँ। इसका प्रयोग बहुत सीमित मात्रा में अन्य के लिए करता हूं। इसमें केवल विशुद्ध सात्विक रीति का ही प्रयोग होता है, कई बार सात्विक प्रधान राजसी पद्धति भी होती है पर पूर्ण सतर्कता एवम् शुद्धता के साथ। स्वयम् की आध्यात्मिक उन्नति और शक्तिवृद्धि हेतु ही इसका प्रयोग बहुल रूपेण होता है।

अब रहा प्रश्न कर्मकांड का। इसके विषय में पूछने वाले बहुत से लोग आते हैं। तो हाँ, मैं कर्मकांड भी कराता हूं। लेकिन इसमें शास्त्रोक्त वैज्ञानिक पद्धति का ही प्रयोग होता है, जिसे प्रमाणित रूप से ऋषिपरंपरा ने स्वीकार किया है। आडम्बर और चापलूसी मुझे बिल्कुल पसंद नहीं। अब यहाँ भी प्रश्न है कि कौन कौन से अनुष्ठान कराते हैं ? तो इसका उत्तर है कि जितने भी प्रचलित अनुष्ठान हैं, जैसे कि मृत्युंजय, रुद्राभिषेक, वास्तुशांति, महाविद्या प्रयोग, सन्तानगोपाल, श्रीमद्भागवत, अखंड रामायण, दुर्गा नवरात्र, कात्यायनी प्रयोग, श्रीमद्भगवद्गीता, बटुक भैरव, श्रीसूक्त आदि तमाम कर्मकांडीय प्रयोग मैं कराता हूँ। बड़े बड़े अनुष्ठान जैसे प्राण प्रतिष्ठा, रुद्रयज्ञ, नारायण यज्ञादि भी इसी में सम्मिलित हैं।

विवाह, अंत्येष्टि, श्राद्ध कर्म आदि मैं नहीं कराता। अतः किसी को भी कोई भी अनुष्ठान कराना हो या प्रवचन कराना हो तो मुझसे निःसंकोच संपर्क कर सकते हैं। परंतु ध्यान रहे :- मुझसे अनुष्ठान कराने के लिए यजमान में निम्न बातें होनी चाहिए :-

वह आर्य नमाजी, साई निर्मल रामपाल आदि का भक्त, ब्रह्माकुमारी, गायत्री परिवार आदि का अनुयायी न हो। शाकाहारी हो। यदि न हो तो अनुष्ठान के बाद आजीवन शाकाहार का प्रण करे। शराब और अवैध सम्बन्ध रखने वाला न हो।

संपर्क सूत्र :- https://www.facebook.com/Bhagavatananda

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संस्थापक सह महानिदेशक at आर्यावर्त सनातन वाहिनी
एस. जी. एम. कॉलेज, पंडरा रांची तथा प्रयाग संगीत समिति से शिक्षा प्राप्त, श्रीभागवतानंद जी अभी रांची में रह रहे हैं एवं रांची यूनिवर्सिटी में संस्कृत में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं|
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