हिन्दू धर्म के बारे में

पहली बात तो यह है कि हिन्दू सनातन धर्म है और यह तब से जब से मानव है| इस धर्म में शाकाहारी भी हिन्दू है, मांसाहारी भी हिन्दू है, एवं सर्वाहरी भी हिन्दू है| जो भगवान् में विश्वास रखता है वो भी हिन्दू है, जो नहीं रखता वो भी| जो मंदिर जाकर पूजा करता है वो भी हिन्दू है, जो मंदिर नहीं भी जाता वो भी| जो व्यक्ति वेदों को मानता है वो भी हिन्दू है, जो वेदों को नहीं मानता वो भी| जो मूर्तिपूजा करता है वो भी हिन्दू है, जो निराकार को पूजता है हो भी| हिन्दू धर्म कई अन्य धर्मों (सिख, बौद्ध, जैन, आदि) का प्रारंभिक चरण गुरु है| इसके साथ ही यह सनातन हिन्दू धर्म कई अन्य सम्प्रदायों (निरंकारी, राधास्वामी, डेरा सच्चा सौदा, ब्रह्मकुमारी आदि) को भी अपनी अलग एवं स्वतंत्र सोच रखने का अधिकार देता है|

अन्य धर्मों के ठीक विपरीत इस धर्म को अपनाने के लिए तुरंत के पैदा हुए बच्चे को कोई दीक्षा या बप्तिस्मा नहीं लेना होता| ना ही हिन्दू कहलाने के लिए किसी संस्था की सदस्यता लेनी अनिवार्य नहीं है| हालाँकि दूसरे धर्म से हिन्दू धर्म में आने के लिए यज्ञ तथा कुछ प्रारंभिक संस्कार अवश्य करने पड़ते हैं परन्तु कोई सदस्यता नहीं चाहिए होती| हिन्दू धर्म में १६ संस्कार तो अवश्य होते हैं मगर जो उनका पालन नहीं करता वह हिन्दू धर्म से निष्काषित तो नहीं होता चाहे उसको उन संस्कारों से होने वाले लाभ तथा पुण्य प्राप्त ना हों|

हिन्दू धर्म किसी ऐतेहासिक घटना पर आधारित नहीं है अपितु उतना ही पुराना है जितना की मानव| आइये इस धर्म की शुरुआत कब हुयी उस पर दृष्टि डालते हैं|

30 कला = 1 मुहूर्त

30 मुहूर्त = 1 नक्षत्र अहोरात्रम (1 दिन)

30 नक्षत्र अहोरात्रम (30 दिन) = 1 मास

2 मास = 1 ऋतु

3 ऋतु = 1 अयाना

2 अयाना = 1 संवत (1 साल)

कलियुग = 432,000 साल

द्वापरयुग = 2 कलयुग = 864,000 साल

त्रेतायुग = 2 द्वापरयुग = 1,296,000 साल

सतयुग = 2 त्रेतायुग = 1,728,000 साल

1 महायुग = सतयुग त्रेतायुग द्वापरयुग कलियुग

1 मन्वन्तर = 71 महायुग

हर मन्वन्तर के बाद समस्त पृथ्वी एक समाधि कला (एक मन्वन्तर के ही बराबर समय) के लिए जल में डूब जायेगी।

1 कल्प = 1000 महायुग = ब्रह्मा का एक दिन

ब्रह्मा के 30 दिन = ब्रह्मा का 1 मास (1 माह)

ब्रह्मा के 12 माह = ब्रह्मा का 1 साल

ब्रह्मा के 50 साल = 1 परार्ध

2 परार्ध = ब्रह्मा के 100 साल = 1 पर = 1 महाकल्प = ब्रह्मा की पूरी आयु = 311.04 ट्रिलियन साल = 3,110,40,000,000,000 साल

अभी हमारे हिन्दू सनातन धर्म के रचियता (भगवान ब्रह्मा) की उम्र मात्र 50 साल हो चुकी है और अभी उनके 51वें वर्ष का पहला दिन अर्थात पहला कल्प, जिसका नाम शवेतवारह कल्प है, चल रहा है। उनके इस दिन में अभी तक छह मन्वन्तर पहले ही खतम हो चुके हैं। अभी सातवां मन्वन्तर वैवस्वतः मन्वन्तर यानी श्रद्धादेव मन्वन्तर चल रहा है। इस वैवस्त मन्वन्तर में, 27 महायुग (मतलब 27 बार चारों युग) पहले ही बीत चुके हैं तथा 28वें महायुग के सतयुग, त्रेता एवं द्वापर भी बीत चुके हैं। यह 28वां कलियुग है जोकि आपके ईसाई कैलेंडर के हिसाब से 3102 बिफोर क्राइस्ट आरम्भ हुआ है। क्यूंकि ब्रह्मा के पहले 50 साल यानी एक परार्ध बीत चूका है तो इसे द्वितीय (दूसरा) परार्ध भी कहते हैं।

इतने अधिक पुराने हिन्दू सनातन धर्म में बहुत से परिवर्तन हुए हैं जैसेकि महर्षियों तथा प्रकांड पंडितों द्वारा कई रचनाएं शामिल हैं| इनमें से कुछ अवव्यस्थित क्रम में निम्नलिखित है|

  • पहले वेद की ब्रह्मा द्वारा रचना – ऋग्वेद
  • मानव निर्माण के बाद महर्षि वेदक्व्यास द्वारा ऋग्वेद को तीन भागों में बांटा जाना – ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद
  • सरलीकरण के लिए वेदक्व्यास द्वारा चतुर्थ वेद की रचना – अर्थवेद
  • अश्विनी कुमारों द्वारा आयुर्वेद की रचना
  • महर्षि वाल्मीकि द्वारा रामायण की रचना
  • वेदक्व्यास द्वारा ज्ञान संताप हरने के लिए श्रीमद्भागवत पुराण की रचना
  • अपने मन को शांत करने हेतु वेदक्व्यास तथा भगवान् गणेश द्वारा महाभारत (जय संहिता) की रचना
  • महर्षि पाणिनि द्वारा अष्टाध्यायी की
  • महर्षि पतंजलि द्वारा योग सूत्रों तथा सांख्य की रचना

इनके अलावा १८ पुराण, २४ उपपुराण तथा १०८ उपनिषद् हैं| यदि चार वेदों को विभिन्न प्रकारों में विभक्त किया जाए तो उनके यह प्रकार होंगे – संहिता (देवी-देवताओं की पूजन विधि),ब्राह्मण (वैदिक कर्मकांड एवं यज्ञ), आरण्यक (रूपक कथाएं एवं तत्त सम्बन्धी दर्शन), तथा उपनिषद् (वैदिक दर्शन)|

यह बात अलग है कि आजकल के विद्वान पुराणों, संख्याओं, प्राचीन साहित्य, उपपुराणों तथा उपनिषदों  की वैध्यता पर ही सवाल उठाते हैं मगर क्या ऊँगली उठाने से सत्य असत्य बन जाता है| ऊँगली उठाने वालों को यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत भूमि जहाँ हिन्दू धर्म का जन्म हुआ ३००० से भी अधिक सालों तक मुगलों तथा अंग्रेजों का गुलाम रहा है| क्या इस गुलामी के दौर में इन साहित्यों की गलत प्रतियां बनाकर मूल ग्रंथों को छुपाया नहीं जा सकता है? उदहारणतया पद्म पुराण में बोद्धों और जैनों का उल्लेख है तथा भविष्य पुराण में मुगलों एवं मुग़ल शासन की महिमा उल्लेखित है| क्या एक धर्म के ग्रन्थ में उसी धर्म के विरोधियों तथा अन्य धर्मों का उल्लेख हो सकता है?

यदि अवतारों की बात करें तो हिन्दू धर्म मुख्यतया ब्रह्मा, विष्णु, एवं महेश तथा उनकी स्त्री शक्तियों क्रमशः सरस्वती, लक्ष्मी, तथा पार्वती(सती) पर आधारित है| त्रिदेवों के साथ त्रिदेवियाँ भी समय-समय पर धरा पर अवतरित हो धर्म का उत्थान करते हैं| आज के कलियुग में अभी हाल ही हुए प्रमुख अवतार यह थे – विष्णु अवतार – श्रीराम, विष्णु अवतार – श्रीकृष्ण, ब्रह्मा अवतार – तुलसीदास, शिव रूद्र – हनुमान, वरुण अवतार – झुलेलाल, राधा अवतार – चैतन्य महाप्रभु, आदि|

अब यह बताइए कि क्या उपरोक्त अवतारों में तथा ग्रंथों में कोई भी अंतिम था? नहीं| हिन्दू धर्म में कोई भी अवतार, ऐतेहासिक घटना, तथा ग्रन्थ स्थिर एवं अंतिम नहीं है| यह एक गतिमान तथा परिवर्तनशील धर्म है|

सन्दर्भ स्त्रोत-

विकिपीडिया

राजीव मल्होत्रा की पुस्तक – विभिन्नता (Being Different)

हिन्दू धर्म तथा अन्य अब्राह्मिक धर्मों में अंतर

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