रावण जैसा भाई

कहते हैं कि रावण ने अपनी बहन की रक्षा के लिए अपना जीवन, अपना परिवार, और अपना राज्य बलिदान कर दिया था तथा शत्रु की स्त्री को हरण के बाद भी छुआ नहीं था| मगर सच्चाई क्या है? आइये रावण की सच्चाई जानिए|

सतयुग में रावण ने राजकुमारी से साध्वी वेद्छाया का हरण कर बलात्कार करने की कोशिश की थी तो देवी ने श्राप दिया था कि उनके जैसे दिखने वाली लड़की उसकी मृत्यु का कारण बनेगी|

मंदोदरी रावण से शादी करने को तैयार नहीं थी तो उसने मंदोदरी के पिता मय दानव तथा उनके परिवार को बंधक बनाकर विवश करने के बाद ही मंदोदरी ने विवाह के लिए हाँ करी थी|

एक अन्य अप्सरा-समकक्ष देवी का हरण कर, उसके पति का उसके सामने ही वध किया तथा उसका बलात्कार किया|

ऐसे ही कुछ बलात्कार कर जब रावण ने देवी अनुसूया के साथ बलात करने की कोशिश की तो देवी अनुसूया ने श्राप दिया की यदि तुमने किसी भी स्त्री के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश करी तो तुम्हारे प्रत्येक शीश के सौ टुकडे हो जायेंगे|

इन सबके बावजूद भी रावण ने सीता का अपहरण किया था| सीता को अशोकवाटिका में कैद करने के बाद जब रावण ने उनकी तरफ कदम बढाया तो माता सीता ने अपने सतीत्व के बल पर उसकी तरफ एक तृण फैंक कर कहा कि यदि तुमने इस तृण को पार करने की कोशिश करी तो तुम भस्म हो जाओगे| कहते हैं कि फिर भी रावण ने जब सीता की तरफ कदम बढाया तो आकाशवाणी हुयी कि हे रावण! सती अनुसूया का श्राप मत भूलो कि किसी भी स्त्री से जबरदस्ती करने की कोशिश करने पर तुम्हारे सभी दस सिर एक-एक कर 100 टुकड़ों में बंट जायेंगे|

रावन ने अपनी बहन चंद्र्नाखा (शूर्पनखा) का विवाह कालकेय दैत्यों के वंशज विद्युत्विजह्य से हुआ था| जब विवाह के बाद उसने अपना राज्य रावण के अधीन करने से मना किया, तब रावण ने अपनी बहन चंद्र्नाखा के पति विद्युत्विह्जय का उसी के समक्ष वध कर दिया था| अपने बहनोई को मारते वक्त रावण ने अपनी बहन की पुकार को ही नहीं सुना था|

जब भी रावण किसी राज्य पर आक्रमण कर उसे अपने अधीन कर लेता था तो वह अपनी सेना को वहां पर अत्याचार करने के लिए स्वतंत्र कर दिया था| रावण से पूर्व सिर्फ दैत्य और दानव दो ही वंश असुर यानि देवताओं के शत्रु होते थे| रावण तथा उसकी माँ कैकसी ही राक्षसों के वंश के संस्थापक थे, राक्षस वो होते हैं जो मानव और दानव या मानव और दैत्य की उपज हों| इतिहास में सर्वप्रथम रावण की माँ कैकसी (दैत्य वंश के सुमाली की पुत्री) ने ऋषि विश्र्वा को फंसाकर दुनिया के पहले राक्षस – रावण को जन्म दिया था| रावण के लिए अपने वंश को फैलाना बहुत जरुरी था तो अधिग्रहित राज्यों में वो मानवीय स्त्री और पुरुषों को जबरदस्ती दैत्यों और दानवों के साथ संसर्ग कर राक्षसों को उत्पन्न करने को विवश किया था| अधिकतर रावण की सेना की शिकार स्त्रियाँ ही होतीं थी|

मानव ही नहीं, रावण ने पाताल के नागलोक पर आक्रमण किया तथा नागराज वासुकी को उनकी पुत्री सुलोचना का विवाह जबरदस्ती अपने पुत्र इन्द्रजीत मेघनाद के साथ करवाया था|

इन सब के बाद भी यदि कोई बहिन रावण के जैसा भाई मांगती है तो यह उसका भाग्य ही होगा कि ऐसा भाई उसे मिला|

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