उत्तम ब्राह्मण की महिमा

ऊँ जन्मना ब्राम्हणो, ज्ञेय:संस्कारैर्द्विज उच्चते।
विद्यया याति विप्रत्वं, त्रिभि:श्रोत्रिय लक्षणम्।।

ब्राह्मण के बालक को जन्म से ही ब्राह्मण समझना चाहिए। संस्कारों से “द्विज” संज्ञा होती है तथा विद्याध्ययन से “विप्र” नाम धारण करता है।
जो वेद,मन्त्र तथा पुराणों से शुद्ध होकर तीर्थस्नानादि के कारण और भी पवित्र हो गया है, वह ब्राह्मण परम पूजनीय माना गया है। पढ़ना जारी रखे उत्तम ब्राह्मण की महिमा

वेद, आयुर्वेद और मांसाहार

हम रोजाना उठते हैं, प्रार्थना में अपने शास्त्रों का पठन करते हैं और समझते हैं कि हमारे पुरखों ने ग्रन्थ लिखे, हम तक ऐसे के ऐसे पहुंचे और हम उनको पढ़कर लाभान्वित हो रहे हैं। अगर आप ऐसा समझते हैं तो हम सरासर गलत हैं। पढ़ना जारी रखे वेद, आयुर्वेद और मांसाहार