शिवलिंग पर जल, बिल्व पत्र और आक क्यूं चढ़ाते हैं?

कांवड़ क्यों  लाते हैं यह तो शायद सबको ही पता हो अगर नहीं मालूम तो कृपया नीचे दिए हुए चित्र में कथा पढ़ लें। परंतु क्या आपको किसी ने यह नहीं बातया की सिर्फ शिवलिंग पर ही जल क्यूं चढ़ते हैं और शिव मूर्ति पर क्यूं नहीं?

kaanvad - neelkanth

परंतु क्या आपको किसी ने यह नहीं बातया की सिर्फ शिवलिंग पर ही जल क्यूं चढ़ते हैं और शिव मूर्ति पर क्यूं नहीं? क्यूं शिवलिंग पर बिल्व पत्र, आक का पता, आकमदा, धतूरा, तुलसी, गुड़हल, आदि क्यूं चढ़ाये जाते हैं?

यह जानने के लिये आपको सृष्टि के आरंभ में जाना होगा और तत्कालीन वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी नज़र में रखते है|पुराणों में लिखा की जब कुछ भी नहीं था तो परमतमा ने खुद को परकट किया और अपने में एक स्त्री शक्ति को स्थान देकर पृथक किया| अन संयोग से एक अंडज़ की उतपति हुई जो फैलता गया और बिग बैंग थेओरी को सार्थक करता हुया फैलता गया और अभी तक फेल रहा है| स्त्री पुरुष ने स्वयं को तीन भागों में पृथक कर त्रिदेवों और त्रिशक्तियों को स्थान दिया| परम भगवान शिव ने ब्रह्माण्ड सृजणी शक्ति के साथ एक लिंग में प्रकट हुये जिसका ना कोई आदि था और ना ही कोई अंत| विष्णु और ब्रहामा जी में प्रतियोगिता हुई और लिंग ने कहा कि जो इस आकर का आदि या अंत पा लेगा वो सर्वपूजित होगा| अंत सत्य की वजह से विष्णु जीते।

उस ब्रह्माण्ड सृजनी शक्ति के साथ शिव जी ने लिंग रूप में धरती पर निवास किया। वह शक्ति और कुछ नहीं परमाणु और अणु शक्ति थी जिससे आज एटम बम्ब बनाये जाते हैं और इसकी शक्ति से पहले ब्रह्मास्त्र बनते थे। शिवलिंग का ऐसा आकार भी इस लिए है ताकि इसके अंदर होने वाले विस्फोटों और उनकी ऊर्जा को अंदर ही रखा जा सके। ऐसा ही आकर आत्मा का है।

भारत का रेडियोएक्टिविटी मैप उठा लो तो हैरान हो जाओगे की भारत सरकार के नुक्लिएर रिएक्टर के अलावा सभी ज्योत्रिलिंगो के स्थानों पर सबसे ज्यादा रेडिएशन पाया जाता है। शिवलिंग और कुछ नहीं बल्कि न्यूक्लिअर रिएक्टर्स ही हैं तभी उनपर जल चढ़ाया जाता है ताकि वो शांत रहे। महादेव के सभी प्रिय पदार्थ जैसे किए बिल्व पत्र, आक, आकमद, धतूरा, गुड़हल, आदि सभी न्यूक्लिअर एनर्जी सोखने वाले हैं। क्यूंकि शिवलिंग पर चढ़ा पानी भी रिएक्टिव हो जाता है तभी जल निकासी नलिका को लांघा नहीं जाता। भाभा एटॉमिक रिएक्टर का डिज़ाइन भी शिव लिंग की तरह है।

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