जीन्स पेंट क्यूँ नहीं पहने?

आर्यावर्त सनातन वाहिनी “धर्मराज” क्यों नहीं पहने जीन्स?

मित्रों।वंदे मातरम्। आज जीन्स पूरे विश्व का प्रमुख परिधान बन गया है।इसके दुस्प्रभाव पर थोड़ी चर्चा………. ………………… सर्वप्रथम जीन्स आया कहाँ से!!

जीन्स का आविष्कार 18वीं शताब्दी में फ्रांसीसी विद्रोह के समय सैनिकों के लिए किया गया ताकि युद्ध लड़ने में सुविधा हो।हमारे भारत में युद्ध नरसंहार का नहीं,वीरता का प्रतीक होता था। चूंकि हम स्त्री,बच्चों,बूढ़े को नहीं मारते थे, निहत्थे और शरणार्थी पर भी वार नहीं करते थे तो हमें जीन्स की जरूरत नहीं थी।

जब प्रथम विश्वयुद्ध के समय अधिकांश पुरुष लडाई में चले गये और घर चलाने के लिए स्त्रियों को काम पर जाना पडता था तो कई स्त्रियों के लंबे वस्त्र मशीनों में उलझ जाते थे जो जानलेवा भी होता था,तो उन्होंने भी जीन्स पहनना प्रारंभ कर दिया। यूरोप का वातावरण अत्यंत ठंडा है।वहाँ साल के 6 महीने बारिश और 3 महीने बर्फबारी होती है।अतः वहाँ के मौसम और फूहडता के कारण उनके लिए जीन्स उपयुक्त है।पर चूँकि भारत अर्धग्रीष्म क्षेत्र में आता है,तो यहाँ मौसम और सभ्यता,दोनों के हिसाब से जीन्स पूर्णतया अनुपयोगी है। जीन्स इतना कठोर होता है कि पुरुषों के लिंग एवं अंडकोष पर अत्यधिक दबाव पड़ता है जो संक्रमण का कारण बनता है।

दूसरे अंडकोष को वीर्य निर्माण एवं संरक्षण के लिए जितनी जगह चाहिए,वह जीन्स के दबाव के कारण नहीं मिलता,जो शीघ्रपतन,स्वप्नदोष एवं नपुंसकता का कारण है। उसी प्रकार जीन्स का यही दबाव स्त्रियों में योनि एवं गर्भाशय पर दुस्प्रभाव डालता है जिससे संबंधित अंगों की मांसपेशियाँ संकुचित हो जाती हैं और प्रसव के दौरान अक्सर आधुनिक पीढ़ी में ऑपरेशन की समस्या आ जाती है जो पहले की पीढ़ियों में नहीं के बराबर थी।

यह मासिक अनियमितता, प्रदर एवं गुप्तरोगों का भी कारण है। और साथ ही साथ असभ्यता, अर्धनग्नता एवं फूहडता का प्रतीक भी। एक धोती या साड़ी से 3-4 लोगों की इज्जत ढकी जा सकती है। पर एक जीन्स से नहीं।

अभी हाल ही में खबर आई थी कि टाईट जीन्स पेंट पहनने की वजह से एक स्त्री दम घुटने के कारण बेहोश हो गयी थी| ऑस्ट्रेलिया में एक 35 वर्षीय युवा स्त्री पार्क में गश खाकर गिर पड़ी और काफी देर तक अकेले बेहोश पड़ी रही| थोड़ी देर बाद, होश आने पर वो मुख्य मार्ग तक गयी और वहां से किराए की गाडी कर चिकित्सालय पहुंची| मगर इतनी डर तक उसके निचले हिस्से ने काम करना बंद दिया था| रॉयल एडिलेड हस्पताल, ऑस्ट्रेलिया के स्नायु विशेषज्ञों ने पाया कि स्किनी जीन्स पेंट की वजह से उसकी मांसपेशियों और स्नायु तंत्र को नुक्सान पहुँचाया था| (सन्दर्भ – वाशिंगटन पोस्ट)

अगर द्रौपदी, साड़ी की जगह जीन्स पहनी होती तो श्रीकृष्ण कितनी बार उन्हे जीन्स पहनाते? जितने भी महापुरुष हुए हैं… श्रीराम. श्रीकृष्ण. बुद्ध. हनुमान. युधिष्ठिर. चाणक्य. महाराणा प्रताप. शिवाजी. लक्ष्मीबाई .. आजाद .. भगतसिंह.. विवेकानंद.. दारासिंह…आदि उन्होंने कभी जीन्स नहीं पहना और तभी जाकर दुनिया आज भी सम्मान के साथ उन्हें याद करती है।.. तो अपने विवेक से विचार करके अपने स्वास्थ्य एवं संस्कृति का नाश न करें…………………………

श्रीभागवतानंद गुरु
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संस्थापक सह महानिदेशक at आर्यावर्त सनातन वाहिनी
एस. जी. एम. कॉलेज, पंडरा रांची तथा प्रयाग संगीत समिति से शिक्षा प्राप्त, श्रीभागवतानंद जी अभी रांची में रह रहे हैं एवं रांची यूनिवर्सिटी में संस्कृत में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं|
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