अम्बेडकर और दलितिस्तान

भीमराव अम्बेडकर ने आज़ादी की लड़ाई में कोई भूमिका नहीं निभाई थी। भले ही वो दलितों की लड़ाई लड़े हों, यदि उनके मनसूबे पूरे होते तो आज आप भारत, पाकिस्तान, और बांग्लादेश (तब का पूर्वी पाकिस्तान) के साथ भारत की ही जमीन पर बना हुआ एक और देश देखते जिसका नाम होता “दलितिस्तान”। पढ़ना जारी रखे अम्बेडकर और दलितिस्तान

भारत को आज़ादी नहीं मिली

1930 के दशक में कांग्रेस सिर्फ डोमिनियन स्टेटस चाहती थी और इसी बाबत कांग्रेस का नरम दल सरकार से बात करता था एवं गरम दल को खत्म किया जाता रहा था। सुभाष बाबू ने द्वितीय विश्व युद्ध की भविष्यवाणी 1937 में ही कर दी थी। 1939 में जर्मनी के फ़्रांस पर हमले के वक्त गांधी की इच्छा के विरुद्ध सुभाष बाबू पुनः कांग्रेस के राष्ट्राध्यक्ष बन गए थे और वो देशव्यापी आंदोलन चला संकटग्रस्त इंग्लैंड को दबाना चाहते थे। मगर गाँधी और नेहरू कहते थे कि हमें ब्रिटेन की बर्बादी पर आज़ादी नहीं चाहिए और कोई आंदोलन अभी नहीं होगा। पढ़ना जारी रखे भारत को आज़ादी नहीं मिली

आज़ादी मिलने और विभाजन की कहानी

हमारा देश कोई लड़कर आज़ाद नहीं हुआ, जो अपनी मर्ज़ी से विभाजन करता| पहले आज़ादी कैसे मिली ये पढ़ लो, फिर विभाजन की दास्तान सुनियेगा| अंग्रेज़ द्वितीय विश्व युद्ध के समय बहुत कमजोर थे, इतने कि वो जर्मनी, खासतौर पर हिटलर, के रहमोकरम कर जिन्दा थे| कमोबेश यही हालत अमेरिका का था| पढ़ना जारी रखे आज़ादी मिलने और विभाजन की कहानी