अजीत डोभाल पर निशाने का जवाब

अजीत डोभालआज जो लोग अपनी क्षमता ना होते हुए भी भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पर ऊँगली उठा रहे हैं, खासकर कांग्रेसी संदीप दीक्षित तो उन्हें भारत के 2005-2010 के NSA के बारे में भी मालूम होना चाहिए| ये थे श्रीमान एम० के० नारायण, जिनकी योग्यता एक थानेदार बनने के लायक नहीं थी मगर फिर भी कांग्रेस की राजमाता श्रीमती सोनिया गाँधी ने इन्हें अपना कृपापात्र बनाकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बना दिया|संजय बरुआ ने अपनी पुस्तक “एक्सीडेंटल प्राइममिनिस्टर” में विस्तार से लिखा है कि कैसे तब के नवनिर्वाचित NSA श्री एम० के० नारायण ने अपनी पहले सरकारी रिपब्लिक डे यानी 26 जनवरी 2005 को कैसे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को नहीं बल्कि सबके सामने सोनिया गाँधी को सलामी सैल्यूट ठोका था| एक सुरक्षा के महतवपूर्ण अधिकारी का इस तरह एक गैरसरकारी और अपने देश के मंत्री को छोड़कर अन्य को सलाम ठोंकना ना सिर्फ उन पर ऊँगली खडी करता है वरन सबको देश के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की अक्षमता और कमजोरी को भी उजागर करता है|

2008 के 26/11 मुंबई हमले इन्हीं एम्० के० नारायण के समय में हुए थे| इंटेलिजेंस इनपुट का क्या तरीका था वो भी देखिये? मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र सरकार चीखती रही कि कोई इंटेलिजेंस इनपुट नहीं हुआ, देश की इंटेलिजेंस एजेंसीज नाकामयाब है, नयी एजेंसी बनाई जाए| वाह रे राजनीतिज्ञों देश के सबसे वफादार और तेज तरार अफसर ख़राब है और तुम सही| मगर सत्य तो यह है कि आर्मी से रॉ में गए कर्नल श्रीकांत पुरोहित ने नवम्बर 2008 से ठीक छह माह पहले ही मुंबई हमलों की सटीक इनपुट और आतंकियों के नौका के जरिये आने की इनपुट दी थी, मगर उन्हें इसका फल भगवा आतंक में मददगार बताकर जेल में डाल दिया गया, आज तक वो जेल में है|

पूरा देश जानता है कि कैसे तत्कालीन कांग्रेस सरकार मुंबई हमलों को भगवा आतंकी बताने में जुटी हुयी थी| बाकायदा देश के एक मंत्री दिग्विजय सिंह ने मुंबई 26/11 को आरएसएस का हमला बताने के लिए एक किताब भी लांच करी थी| ये तो भला हो हवालदार तुकाराम का जिसने अपने डंडे के दम पर कसाब को जिन्दा पकड़ लिया वर्ना 26/11 को आरएसएस का आतंकी हमला बता दिया जाता और सब मान भी लेते|

अब बात करते हैं पठानकोट एयरबेस पर हमले की| जितनी युद्धसामग्री वहाँ आतंकियों को मिली वो एक या दो जन नहीं लेकर जा सकते, वो पहले से वहां मौजूद था| ये कैसे आया, ये तो समय ही बतायेगा| हाँ ये जरुर है कि कोई ना कोई अंदरूनी मदद भी आतंकियों को जरुर मिली होगी तभी आर्मी के बजाय NSG को हमले को विफल करने के लिए भेजा गया| हाल ही में आई० एस० आई० के पकडे गए मुखबिर, पंजाब में सीमा पार तस्करी के जरिये खुलेआम चलता ड्रग्स का कारोबार और एस० पी० साल्विंदर सिंह व् इनके साथियों के बयानों में विरोधाभास अंदरूनी मदद की ओर पक्का इशारा करते हैं|

ऑपरेशन ब्लूस्टार में जबरदस्ती नरसंहार करवाया गया था, वैसा ही ऑपरेशन ब्लैक थंडर में होना था, मगर अजीत डोभाल की मदद से बिना एक गोली चले खालिस्तानी आतंकियों ने आत्मसमर्पण कर दिया था| अजीत डोभाल की सफलताओं और उनसे हुए अपने देश को फायदों की लिस्ट बनाएं तो कलम की स्याही भी ख़त्म हो जायेगी|

इन पर ऊँगली उठाने से पूर्व कांग्रेसी जरा अपने अन्दर झाँक लें|

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