कश्मीर का हल

खून खौल रहा है ना, मेरा भी खून उबाल मार रहा है|

पहले सुकमा में २५ जवान शहीद और उनके शवों के साथ छेड़छाड़ अब कश्मीर में पाकिस्तान की सेना द्वारा भारत के सेना के दो सैनिकों की 200 मीटर अन्दर आकर हत्या और उनके शवों के साथ छेड़छाड़|

ये देखकर गरियाने का मन करता है तो गरिया लेते हैं| आप गरियाइए मोदी को, राजनाथ को, जेटली को| आप उनके विकल्प देख रहे हैं| जबकि मैं समस्या की असली जड़ देखने में यकीन रखता हूँ|

जरा इतिहास में नज़र डालें तो पता लगेगा कि कश्मीर किसकी देन है और नक्सलवाद किसकी देन है? ये सब कांग्रेस की देन है| आज के कश्मीर के हालात पर नजर डालें तो मूल समस्या अब सिर्फ पाकिस्तान नहीं बल्कि चीन भी है|

जब चीन पाकिस्तान द्वारा भारत के कब्जाए इलाकों में CPEC के नाम पर अपनी पैठ बना रहा था तब कांग्रेस की UPA सरकार मनमोहन सिंह के नेतृत्त्व में अलगाववादियों को साथ लेकर ऑटोनोमी की प्रक्रिया पर पाकिस्तान के साथ काम कर रही थी जिसका मतलब होता कि PoK और भारत के जम्मूकश्मीर में पाकिस्तान व् भारत द्वारा अधिकृत एक संयुक्त सरकार राज चलाती| इस बारे में एक फ़ाइल मनमोहन ने नरेन्द्र मोदी को भी दी थी| इसी को लेकर मोदी व् शरीफ में शुरुआती बातचीत भी हुई थी| जाहिर है कि इस सयुंक्त सरकार का पूरा लाभ पाकिस्तान, अलगाववादियों व् अब्दुल्ला परिवार को मिलता| साथ ही चीन भी इसके फल खाता| उस समय इन बातों को देखकर ही चीन ने पाकिस्तान में बहुत पैसा लगाया जिसको पाकिस्तान खुद को बेचकर भी नहीं चुका सकता|

आज भारत कश्मीर समस्या से तभी निजात पा सकता है जब वो रशिया की राह चले जिसने अंतर्राष्ट्रीय दबाव को दरकिनार कर क्रिमिशिया को कब्ज़ा लिया था| यानि भारत को कश्मीर का नासूर मिटाने के लिए PoK हर हाल में कब्जाना होगा| इसके लिए भारत को पाकिस्तान पर आक्रमण करना होगा, मगर जैसे ही सेनायें PoK के क्षेत्र में आगे बढेंगी चीन भारत पर कश्मीर और अरुणाचल की तरफ से जोरदार हमला कर देगा| कारण उसका धन और उसके लोग PoK में होंगे जिनको खतरा बताकर चीन अपने भारत के खिलाफ मनसूबे पूरे करना चाहेगा| जहाँ भारत हाल के हमलों को झेलकर संतुलित कार्यवाही करना चाहता वहीं पाकिस्तान उसे ठीक वैसे उकसा रहा है जैसे उसने 1965 में उकसाया था|

भारत एक साथ चीन और पाकिस्तान दोनों को हरा सकता है मगर इसमें जनधन का बहुत नुकसान होगा| मगर क्या इससे लाभ होगा? बिलकुल नहीं| ट्रम्प के बदले नेतृत्त्व में साथ देता दिखता तुरंत 1971 की तरह पलटी मारेगा और भारत को समझौते की मेज पर हारने को मजबूर कर देगा| तब ना आपको PoK मिलेगा, ना अक्साई चीन और ना ही कश्मीर समस्या का हल| हाँ भारत बहुत पीछे चला जाएगा और उसका सैन्य बल कमजोर भी पड़ सकता है|

तो क्या करना चाहिए?

1. पाकिस्तानी सेना को माकूल सख्त मगर नपातुला जवाब दिया जाए, कोई उग्र कार्यवाही यानि युद्ध नहीं|

2. जम्मूकश्मीर का विभाजन कर जम्मूलद्दाख राज्य बनाया जाए| कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया जाए| – जनसंघ के संस्थापक बलराज मधोक ने यही योजना पहली बार सामने रखी थी|

3. PoK के क्षेत्रों के लिए भारी मात्र में फंड जारी कर सरकार खुद अपने एजेंटों या ख़ुफ़िया रूप से वहां के लोगों को दे|

4. भारत सरकार बलूचिस्तान को एक अलग देश के रूप में मान्यता देकर संसद में उस पर पाकिस्तान द्वारा कब्जे को स्पष्ट करे|

5. अंतर्राष्ट्रीय पटल पर बलूचिस्तान का मुद्दा उछाला जाए व् देश में आरएसएस ठीक वैसा आन्दोलन चलाये जो बंगलादेश बनवाने के लिए 1970 के दशक में चलाया गया था|

6. सरकार सीधे प्रत्यक्ष रूप से बलूचिस्तान आन्दोलन के लिए मदद दे|

#कश्मीर_समस्या

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