अनेकात्म रहस्य

अक्सर लोग पूछते हैं कि सनातन ग्रंथों के अनुसार भगवती से विष्णु और विष्णु से भगवती उत्पन्न हुई हैं। ऐसे ही शिव से ये दोनों और इन दोनों से शिव हुए हैं। आदि आदि फिर इनमें श्रेष्ठ कौन। पढ़ना जारी रखे अनेकात्म रहस्य

पूजा अनुष्ठान हेतु सम्पर्क करें

मैंने गौर किया है कि मुझसे कई बार कई लोग एक विशेष प्रश्न पूछते हैं। उसका उत्तर मैं यहीं दे रहा हूँ। पढ़ना जारी रखे पूजा अनुष्ठान हेतु सम्पर्क करें

ब्राह्मण का महत्त्व

यह पोस्ट विभिन्न लोगों द्वारा पूछे गए प्रश्नों तथा मेरे द्वारा दिए गए उनके उत्तरों पर आधारित है। पढ़ना जारी रखे ब्राह्मण का महत्त्व

अन्य धर्मों का उद्भव

आज नीतीश मिश्र जी ने मुझसे एक प्रश्न किया‬:
आदरणीय भागवतानंद जी!
आप बहुत अच्छे विद्वान् हैं। कई दिनों से एक प्रश्न मेरे हृदय में उबाल ले रहा है यदि आप उसका निराकरण करेंगे तो अतिकृपा होगी। पढ़ना जारी रखे अन्य धर्मों का उद्भव

शङ्कराचार्य को समझें

आज किसी सज्जन ने कहा कि शंकराचार्य जी अरबपति बन कर बैठे हैं। कुछ करते धरते नहीं हैं। उन्हें मेरा उत्तर :-
यदि जगद्गुरु शंकराचार्य जी अरबपति हैं तो उन्हें होना भी चाहिए। वैसे भी वो संपत्ति पीठ की है, उनकी निजी नहीं, और न इसका उपयोग उनके निजी कार्य में हो रहा है। पढ़ना जारी रखे शङ्कराचार्य को समझें

वेद श्रुति को समझो

हर श्रुति के दो खण्ड होते हैं – मन्त्र भाग और ब्राह्मण भाग । श्रुति को समझने के लिए जिनकी जरूरत पड़ती है उन्हें भी विद्या कह दिया जाता है । श्रुतियों का अर्थ करने के लिये व्याकरण की बड़ी जरूरत होती है । पढ़ना जारी रखे वेद श्रुति को समझो

राखी क्या है?

रक्षा बंधन पर्व लक्ष्मी जी का बलि को राखी बांधने से जुडा हुआ है। कथा कुछ इस प्रकार है एक बार की बात है, कि दानवों के राजा बलि ने सौ यज्ञ पूरे करने के बाद चाहा कि उसे स्वर्ग की प्राप्ति हो, राजा बलि कि इस मनोइच्छा का भान देव इन्द्र को होने पर, उनका सिहांसन डोलने लगा। पढ़ना जारी रखे राखी क्या है?

भगवान् भोजन कैसे करते हैं?

हिन्दू धर्म में भगवान् को भोग लगाने का विधान है ..क्या सच में देवतागण भोग ग्रहण करते ? पढ़ना जारी रखे भगवान् भोजन कैसे करते हैं?

शिखा का महत्त्व

हिन्दू धर्म का छोटे से छोटा सिध्दांत,छोटी-से-छोटी बात भी अपनी जगह पूर्ण और कल्याणकारी हैं। छोटी सी शिखा अर्थात् चोटी भी कल्याण,विकास का साधन बनकर अपनी पूर्णता व आवश्यकता को दर्शाती हैं। पढ़ना जारी रखे शिखा का महत्त्व

क्या हैं श्रावणी कर्म?श्रावणी पर्व का पौराणिक महत्व

प्राचीन काल से ही तिथि, पर्व और उपासना का विशेष महत्व रहा है। आधुनिक वैश्विक प्रगति में जहां हमारा देश नई-नई बुलंदियों को छू रहा है, वहीं अपनी प्राचीन मान्यताओं को भी बड़ी सहजता से संजोए हुए है। यद्यपि कुछ पर्वों के मनाने में कुछ आधुनिकता भी आ गई है लेकिन मूल तत्व से जुड़ाव नहीं टूटा है।  पढ़ना जारी रखे क्या हैं श्रावणी कर्म?श्रावणी पर्व का पौराणिक महत्व