राष्ट्र गाँधी को सुन समझ न सका

“सुनना तो दूर मुझे तो कोई समझ भी ना सका” – मोहनदास गाँधी

प्यारेलाल लिखते हैं कि अंतिम दिनों में गाँधी कहा करते थे कि मेरी सुनता कौन है? यदि गाँधी जी अपनी इच्छा के अनुसार 125 वर्ष तक जीवित रहते तो अपनी उम्र के 124वें वर्ष में कहते कि सुनना तो दूर कोई समझ भी नहीं सका। पढ़ना जारी रखे राष्ट्र गाँधी को सुन समझ न सका

आरएसएस बनाम कांग्रेस

आरएसएस बनाम कांग्रेस का जब मूल्यांकन करते हैं तो पाते हैं कि जहां कांग्रेस की स्थापना अंग्रेजों में एक सेवानिर्वित ए0 ओ0 ह्युम ने जनता में ब्रिटिश सरकार के प्रति सहानुभूति जगाने के लिए करी थी वहीँ आरएसएस की स्थापना डॉक्टर केशव राव बलिराम हेडगेवार ने पूर्णतया राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की विचारधारा को बल देने के लिए करी थी| जहां आरएसएस के लिए वीर विनायक दामोदर सावरकर शीर्ष नेता थे वहीँ कांग्रेस अपनी सारी नाकामियाँ मोहनदस करमचंद गाँधी के पीछे छुपाया करती थी|

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भारतीय स्वतंत्रता के ज्वलंत तथ्य

  1. आज का तीन आयताकार पट्टियों वाले झंडे की रुपरेखा असल में वीर विनायक दामोदर सावरकर और श्यामजी कृष्णा वर्मा ने बनाई थी|
  2. इस झंडे को मैडम भिकाजी कामा, लौह स्त्री, ने स्टुट्गार्ट, जर्मनी में तीसरे अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस सोशलिस्ट कांफ्रेंस में फहराया था|

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आदिल शहरियार और नेताजी के रहस्य का सम्पर्क

आदिल शहरियार के पिता मोहम्मद युनुस खान नेहरु परिवार के करीबी थे और इंदिरा गांधी के निजी  सचिव  थे| संजय गाँधी के शादी के फेरे मोहम्मद युनुस खान के घर हुए थे, इन मोहम्मद युनुस ने एक पुस्तक भी लिखी थी जो भारत में बैन है तथा विदेशों में भी मुश्किल से ही मिलती है, इस पुस्तक में खान ने एक चाबी का जिक्र भी किया था जिसे ढूंढने के लिए इंदिरा गाँधी ने संजय गांधी की लाश छान मारी थी| पढ़ना जारी रखे आदिल शहरियार और नेताजी के रहस्य का सम्पर्क

नेताजी के खिलाफ झूठे प्रचार का जवाब

सबसे पहली बात तो यह है कि पत्रकार या तथाकथित लेखक मणिमुग्ध शर्मा जी ने उन्हीं हथकंडों और प्रचार सामग्री का उपयोग किया है जिसका प्रयोग ब्रिटिश हुकूमत नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और उनकी आज़ाद हिन्द फ़ौज़ को बदनाम करने के लिए करती थी।

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नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की कीमत बनाम भारत सरकार की क्षमता

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उन दिनों की तरह नहीं जब मैं मोदी सरकार और भाजपा सरकार कहा करता था मगर आज मैं अपने देश के केंद्रीय शासन को सीधे तौर पर भारत सरकार कह कर संबोधित कर रहा हूँ| मोदी सरकार प्रथम श्रेणी के मजबूत जीवत के प्रधानमंत्री द्वारा सीमित शासक और अधिक शासन चलाई जा रही मजबूत सरकार का नाम नाम है| परन्तु “मोदी सरकार” शब्दों की सत्यता वहां आकर ख़त्म हो जाती है जब वो कुछ फाइलों को जनता के सामने खोलने से मना कर देती है| ऐसा करके वो एक पुरातन छाप वाली औपनिवेशिक भारत सकरार बन जाती है जिसे १९४७ में औपनिवेशिक स्थिति प्राप्त हुई थी और जो आज तक अंग्रेजों की ब्रितानिया सरकार के नक़्शे कदम पर चलती आ रही है|

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