राष्ट्र गाँधी को सुन समझ न सका

“सुनना तो दूर मुझे तो कोई समझ भी ना सका” – मोहनदास गाँधी

प्यारेलाल लिखते हैं कि अंतिम दिनों में गाँधी कहा करते थे कि मेरी सुनता कौन है? यदि गाँधी जी अपनी इच्छा के अनुसार 125 वर्ष तक जीवित रहते तो अपनी उम्र के 124वें वर्ष में कहते कि सुनना तो दूर कोई समझ भी नहीं सका। पढ़ना जारी रखे राष्ट्र गाँधी को सुन समझ न सका