दिल्ली वासियों के नाम पत्र

प्रिय दिल्ली वासियों,

आजतक आपकी सब तरफ आलोचना ही होती रही है फिर भले ही आपने केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को वोट दिया हो या न दिया हो। अन्ना आंदोलन से एक नायक के तौर पर उभरे केजरीवाल ने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ाई, स्वराज, व्यवस्था परिवर्तन जैसे कई दावे किए। फिर कुछ असंभव वादों 500 स्कूल, 20 कॉलेज, पूरी दिल्ली में 10 लाख सीसीटीवी, मुफ्त वाई फाई, मुफ्त पानी, मुफ्त बिजली जैसे अनेक वादे, सपनों का जाल बिछाकर एक बार नहीं बल्कि दो दो बार दिल्ली की सत्ता हथिया ली।

पहली बार जब 49 दिनों की सरकार से केजरीवाल भागे तब भी ऐसा कोई ठोस मुद्दा नहीं था जिसकी वजह से इनको भागना पड़ा। ख़ैर, इसके बाद आप लोगों ने ये सुनिश्चित किया कि इस बार केजरीवाल भागने न पाए तो आपने उन्हें 67 सीटें दे दीं। केजरीवाल ने फिर एक वादा* किया कि इस बार दिल्ली से बाहर कहीं नहीं जाऊंगा। लेकिन *शर्तें लागू वाले फॉर्मूले के तहत इस महान हस्ति ने दुबारा जब मुख्यमंत्री की शपथ ली तब कोई भी विभाग अपने पास नहीं रखा। यानि कि फिर से ज़बरदस्ती का मुख्यमंत्री बनाया गया तो इसने पहले ही सोच लिया कि काम तो करना ही नहीं है क्योंकि स्वभाव में और डीएनए में ही नौटंकी, मक्कारी, गद्दारी, घटियापन कूट कूटकर भरा है।

अब काम चूँकि करना नहीं था तो 500 करोड़ का बजट विज्ञापन का रख दिया। आये दिन टीवी पर और देश भर के अख़बारों में चार चार पन्नों के विज्ञापन छापने शुरू कर दिए और उन विज्ञापनों में क्या था ये पूरा देश जानता है। अब दिल्ली में आधे से ज़्यादा अधिकार, शक्तियाँ तो केंद्र सरकार और एल जी के पास हैं तो सारा ठीकरा फोड़ने के लिए बहाना भी मिल गया।

अब अधिकार तो चाहिए थे पूरे ताकि मनमर्जी से सारे कांडों को अंजाम दे सकें तो रूख़ कर लिया पंजाब का, फिर कांडों के बाद मस्ती भी मारनी है तो रूख़ कर लिया गोवा का। अब इससे पहले कि कुछ करते दिल्ली में ही एक के बाद एक कांड उजागर होने लगे और इस मानसिक रूप से विक्षिप्त आदमी की नई नई नौटंकियाँ पूरा देश रोज़ देख रहा है। कुछ मीडिया वाले भी इसका काम आसान कर देते हैं। वक़्त बेवक़्त इसका इंटरव्यू और बाईट लेते रहते हैं। इसके “त्रि स्तरीय” परीक्षण से गुज़रे विधायकों, नेताओं की हक़ीक़त भी देश के सामने आ ही रही है।

अगर एक घंटे के लिए भी ट्विटर बंद हो जाये तो शायद ये आदमी क़ुतुब मीनार से या तो खुद ही कूद पड़े या रास्ते चलते लोगों को मारना या खुद के कपडे फाड़कर बाल नोंचना शुरू कर दे।

असल में ये आदमी, इसकी विचारधारा और इसको मानने वाले लोग देश, समाज और परिवारों के लिए घातक हैं। ये सभी मानसिक विक्षिप्त लोग हैं जिन्हें अस्पतालों में भर्ती करके बिजली के झटके दिए जाने की ज़रूरत है।

मोदी जी और ट्विटर के सहारे ही ये आदमी ज़िंदा है, वर्ना अगले ही पल इसकी आत्मा परमात्मा में विलीन हो सकती है।

आज पूरे दिल से दिल्ली वालों का धन्यवाद, शुक्रिया, प्रणाम कि उन्होंने इस आदमी को चुना जिससे इसका असली चेहरा, असली मक़सद देश के सामने आ सका। वर्ना ईमानदारी का चोला ओढ़े ये आदमी देश को ज़्यादा नुक़सान पहुँचा सकता था।

अब पंजाब और गोवा वालों को भी दिल से धन्यवाद, शुक्रिया कहने का मन है कि जिस मनहूस आदमी का सुबह सुबह नाम लेना और शकल देखना भी किसी को पसंद नहीं है तो उसके साथ आपको क्या करना चाहिए बताने की ज़रूरत नहीं।

तो दीजिये इसको PPL यानि पिछवाड़े पर लात !!

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हर्षल खैरनार
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