मसरत आलम भट की गिरफ़्तारी

मसरत आलम की वजह से भाजपा पर ऊँगली उठाने वाले आपिये और कांग्रेसी ये क्यों भूल जाते हैं कि वो भाजपा ही है जिसने अपने राष्ट्राध्यक्ष श्यामाप्रसाद मुख़र्जी की शाहदत सिर्फ कश्मीर को भारत से जोड़ने की अपनी वचनबद्धता की वजह से दी थी। क्यों वो भूल जाते हैं कि जिस समय कश्मीर में हिन्दू का कदम रखना भी गुनाह होता था तब नरेंद्र मोदी ने अपनी जान पर खेल कर कश्मीर के लाल चौक में तिरंगा लहरा कर दिखाया था। भाजपा को छोड़ कर किसी भी पार्टी ने आज़तक कश्मीरी पंडितों के हितों की लिए आवाज़ नहीं उठाई है, यदि केंद्र में भाजपा की सरकार नहीं होती तो भाजपा को 25 तो क्या 5 सीटें भी नहीं मिलनी थी मगर भाजपा तब भी फिर कश्मीर के भारत में होने और कश्मीरी पंडितों की भलाई के लिए आवाज़ उठाती।
दोनों कांग्रेस और आम अादमी पार्टी तब भी थीं जब जम्मू कश्मीर में चुनाव से पहले आई एस आई एस के पोस्टर लगाये गए थे और लड़के सरेआम आई एस आई एस की टी शर्ट्स पहन कर घूमते थे।
ये पार्टियां और मीडिया तब भी थीं जब उमर अब्दुल्लाह के कार्यकाल में हर शुक्रवार को जुम्मे की नमाज़ के बाद पाकिस्तान का झंडा कश्मीर में फहराया जाता था।
कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और मीडिया तब भी थी जब पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के वर्ल्ड कप 2015 के सेमी-फाइनल के दौरान नॉएडा सेक्टर 12 स्टेडियम में मुसलमानों ने पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाये और पाकिस्तानी झंडा भी फहराया था। तब समाजवादी पार्टी सत्ता में थी, उसके मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पास तो उत्तर प्रदेश पुलिस भी थी, क्या कर लिया उन्होंने इनके खिलाफ?
कांग्रेस, केजरीवाल और मीडिया तो तब भी थी जब यही मसरत आलम सेना के खिलाफ मार्च निकाला करता था वो भी महीनों तक।
कांग्रेस, केजरीवाल और मीडिया तो तब भी थे जब मसरत आलम को हर बार भारत विरोधी अपराध के लिए गिरफ्तार किया जाता था, मगर कभी अब्दुल्ला के आदेश पर, कभी कांग्रेसी राजयपाल के आदेश पर तो कभी कोर्ट के आदेश पर जुर्म साबित ना होने या पुलिस की तरफ से कोई जांच ना होने पर उसे रिहा कर दिया जाता था।
तब तो केजरीवाल, मीडिया, आम आदमी पार्टी, और कांग्रेस ने कोई हो हल्ला नहीं मचाया तो आज क्यों ये रुदाली विलाप?
वैसे भी उपरोक्त घटनाओं के समय मौनव्रत धारण करने वाले और शहीद मोहनचंद शर्मा की शहादत का मजाक उड़ाने वाले और बटला एनकाउंटर को फ़र्ज़ी बता जांच करवाने की मांग करने वाले किसी भी राजनैतिक पार्टी – आम आदमी पार्टी या कांग्रेस को कोई हक़ नहीं हैं कि वो अब मसरत आलम को लेकर भाजपा पर आरोप लगाये?
वैसे भी जवाहर लाल नेहरू और मोहनदास गांधी के उपजाए कश्मीर कैंसर के इलाज़ में थोड़े साल और लगेंगे जब तक भाजपा को जम्मू कश्मीर की विधानसभा में बहुमत नहीं मिल जाता, फिर ना तो धारा 370 रहेगी और ना ही अलगाववादी नाम का कोई ग्रुप।
इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा कि आज मसरत की हरकत पर भाजपा दोषी ठहराने वाले मसरत के एनकाउंटर पर मानवधिकार का रोना जरूर रोयेंगे। उम्मीद है आप अभी आतंकी इशरत, आतंकी शोराबुद्दीन, और डॉन तुलसी प्रजापति का एनकाउंटर नहीं भूले होंगे।

चलते चलते एक मजाक

मसरत आलम भट को यदि हरियाणा पुलिस को 2 दिन के लिए भी से दिया तो तीसरे दिन आपको कोई और गली गली कहता मिलेगा, “मैं ही हूँ असली मसरत आलम, वो कब्र किसी और की है।”

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