जवाहर लाल नेहरु का बलिदान – योगदान

आइये जानते हैं, जवाहर लाल नेहरु का बलिदान एवं उनके योगदान के बारे में जो इतिहास में तो नगण्य रहे हैं, यहाँ भी|

        1. देश के हर क्रन्तिकारी के मुकाबले सबसे कम जेल में रहना
        2. देश की राजनीति में पीछे के दरवाजे से आते ही सबका मालिक बनना

      1. एक भी मोर्चे का नेतृत्व ना करना,
      2. पहले पूर्ण स्वराज्य का साथ देना, बाद में धोखा देकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने और मोहनदास गाँधी के उत्तराधिकारी बनने के बदले में अर्ध स्वराज्य यानी डोमिनियन स्टेटस स्वीकार करना,
      3. अंग्रेजों के अधीन उनका कामकाज चलाने के लिए प्रांतीय सरकार का गठन करना,
      4. अंग्रेजों के अधीन किंग जॉर्ज पंचम के प्रति वफ़ादारी की शपथ लेकर 1946 की अंतरिम सरकार बनाना,
      5. 1946 की आज़ाद हिन्द नेवी (इंडियन नेशनल नेवी) यानी रॉयल इंडियन नेवी की क्रांति या म्युटिनी को यह कह कर शांत करवाना कि देश आज़ाद होने वाला है, आप समर्पण कर दो नहीं तो एयरफोर्स और थल सेना भी बगावत पर उतर जायेंगे जिससे भारत में ही अंग्रेजों और अमेरिकियों के खिलाफ युद्ध हो जायेगा जो महात्मा गाँधी को पसंद नहीं है| जब क्रांतिकारियों नहीं माने तो उनको लालच दिया कि आपको आज़ाद भारत में बहाल किया जायेगा मगर क्या 60000 में से एक भी सैनिक पुनः नेवी में रखा गया? नहीं
      6. वेवेल के भारत में वायसराय होते हुए भी इंग्लैंड जाकर एटली को माउंटबेटन की नियुक्ति के लिए पत्र लिखना|
      7. 1946 में सिंगापुर में पुनः गठित स्वतंत्रता स्मारक का उद्घाटन करने सिंगापूर जाना मगर वहां पहुँच कर माउंटबेटन के कहने पर मना कर देना
      8. दिवितीय विश्व युद्ध में जब भारत का एक लाल – सुभाष – अनजान देशों की मदद से अनजान देशों में जाकर सेना का गठन कर रहा था तो उसे जापानियों का एजेंट बताना उनकी अपनी अंतरिम सरकार, बैंक, और जापान से ऋण चल रहा था| और तो और तुमने अंग्रेजों की मदद करने को देश का आह्वान करना|
      9. बजाये सुभाष के मदद करने के, सबके सामने ये कहना कि यदि वो सेना लेकर आया तो मैं तलवार लेकर लड़ने जाऊँगा| अरे निर्लज, उस सुभाष ने तो तुम्हारे नामे से एक रेजिमेंट बना रखी थी और उसी ने कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष होते हुए भी तुम्हे भारत के पहले प्लानिंग कमीशन का अध्यक्ष बना तुम्हें बराबरी का सम्मान दिया था मगर तुमने हरिपुरा सेशन में उसकी पीठ में छुरा घोंप दिया था और आज भी वो ही कर रहे हो|
      10. 1942 में क्रिप्प्स मिशन को सहर्ष स्वीकार करना जिसमे भारत के टुकडे धर्म के आधार पर करने, इसे डोमिनियन स्टेटस देने, प्रिंसली स्टेट्स को भारत या पाकिस्तान जाने अन्यथा खुद को स्वतंत्र देश घोषित करने की स्व्यात्ता देने का जिक्र था|
      11. इसके अलावा ये ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर में भीख के कटोरे में आज़ादी लेने को मानना जिसके अधीन ऑफिस सीक्रेट्स एक्ट 1926 भी शामिल है जिसकी वजह से क्रांतिकारियों और नेताजी की फाइलें कभी declassify नहीं हो सकती!
      12. चन्द्रशेखर आज़ाद की जासूसी कर पुलिस को बताना कि वो अकेले अल्फ्रेड नोबेल पार्क में है| इसका सबूत आज भी लखनऊ CID ऑफिस में एक फ़ाइल में जिसे क्लासिफाइड कर दिया गया है|
      13. 1946 के अंत में जब प्रधानमंत्री पद के लिए वोटिंग हुयी थी तो इन्हें एक भी वोट नहीं मिला था, 2 वोट अम्बेडकर के थे और 11 वोट सरदार पटेल के |
      14. 15 अगस्त की रात को जब देश विभाजन की विभीषिका में जल रहा था तब गवर्नर हाउस में जाम से जाम टकराना|
      15. 1950 तक अपने पासपोर्ट में आज़ाद भारत की जगह “डोमिनियन स्टेटस ऑफ़ इंडिया” लिखवाना और अपने पासपोर्ट में सिर्फ ब्रिटिश क्राउन द्वारा प्रस्तावित देशों की यात्राओं का ही आज्ञा लिखवाना|
      16. भारत की प्रोविजनल गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया जिसका गठन सुभाष ने बर्मा में किया था उसका अनुमोदन आज़ाद भारत की खुद की सरकार से ना करना|
      17. आज़ाद हिन्द फौज के सैनिक जिनका मुकदमा खुद इसलिए लड़ा ताकि 1946 की अंतरिम सरकार पूर्ण बहुमत से बन सके क्यूंकि उस वक्त चुनाव सर पर थे और देश की भावनाएँ आज़ाद हिन्द फौजीयों के साथ थी, उन्हें मत के रूप में भुनवाना जरुरी था|
      18. विभाजान की विभीषिका को शांत करने की बजाय सरदार पटेल से कलह-कलेश करना और माउंटबटन को आज़ाद भारत का भी वायसराय नियुक्त करना|
      19. पटेल के कहने के बाद भी कश्मीर का राग यूनाइटेड नेशन में गाकर सारा मामला जटिल करना| दो दिन और चुप रहते तो पूरा कश्मीर भारत का हिस्सा होता, मगर नहीं अपनी चाटुकारिता जो दिखानी थी अंग्रेजो और माउंटबेटन को|
      20. हाँ तुम थे रसीले तो रहो, मगर या तो घोटालों में तुम्हारा हाथ था नहीं तो तुम मनमोहन के पूर्वज थे जो चुप रहे|
      21. जब देश की सीमा तक चीन सड़क बना रहा था, तुम आर्मी को बढाने के बजाये कहते थी कि आर्मी की जरूरत क्या है, और उससे अपने देश में सड़कें बनवाते थे|
      22. जब पता चला, लेट ही सही कोई बात नहीं तुम अनुभवी नहीं थे, तो स्वीकार कर पूर्ण युद्ध क्यूँ ना करने दिया? किसने कहा था बिना सरदार पटेल से मंत्रणा किये आल इंडिया रेडियो से समर्पण की घोषणा करने को|
      23. किसने कहा था 1956 में देश का गणतंत्र हासिल करवाकर फ्रीमैन की (क्वीन of इंग्लैंड की वफ़ादारी की) शपथ लेने को|
      24. आज़ाद हिन्द फौज के 50000 से जयादा सैनिकों को भूख, तंगहाली, और अंग्रेजों के अत्याचारों के कारण खोया था| इसके अलावा एक लाख से ज्यादा सैनिक देश में आये थे, किसी भी सैनिक को सेना में रखने के बजाये एक अधिसूचना जारी करी कि तीनों सेनाओं की किसी जगह पर नेताजी की फोटो ना रखी जाए| क्या किसी भी मृत या जीवित आज़ाद हिन्द फौज के सैनिक को शहीद का दर्जा दिया?
      25. नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के द्वारा आज़ाद हिन्द फौज के लिए एकत्रित आज़ाद हिन्द सरकार एवं आज़ाद हिन्द बैंक के खजाने को लूटना
      26. नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के गायब होने की जांच लिए जनदबाव में एक-व्यक्ति की कठपुतली कमेटी बनाना वो भी उसे बिना कोई भी अधिकार दिए या घटनास्थल के दौरे का अधिकार दिए बिना, और उसे पहले ही कह देना कि  नेताजी की मौत 1945 में प्लेन क्रैश में हो गयी थी| जब नतीजा ही सुनाना था तो कमेटी बनाई ही क्यूँ थी?

ये था नेहरु का बलिदान| देश का औद्योगीकरण किया नेहरु आपने आज तक तुम्हारे एहसानमंद हैं – जवाहर लाल नेहरु, मगर ऊपर की चिंताओं का|

टिपण्णी

Loading Facebook Comments ...
Loading Disqus Comments ...

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

 

No Trackbacks.