सीमावर्ती जमीन का मामला

मोहल्ले का नामी गुंडा शर्मा जी का पड़ोसी है और काफी धनवान भी है। दुर्भाग्य से उसने शर्मा जी के मकान का कुछ हिस्सा आज से 10 साल पहले अपने मकान में मिला लिया। उस हुयी तोड़फोड़ में सारी दीवार टूट गयी।

मामला पंचायत तक गया मगर समर्थ को कौन दोष देता। शर्मा जी को हारकर अपने पैसे लगा अपने मकान की मरम्मत करानी पड़ी।

नयी दीवार बनने के बाद आज गुंडे पांडे जी कह रहे हैं कि शर्मा जी उनकी जमीन कब्ज़ा अपना एक कमरा और गुसलखाना बना रखा है, अब या तो शर्मा जी जमीन वापिस दें या उसकी कीमत दें वो भी ब्याज समेत। इस बात को 20 साल बीत गए।

गुंडे पांडे और शर्मा जी ने आज अपने पुराने मकानों की जगह कोठियाँ और उनमें दो-दो दुकाने बना ली है मगर झगड़ा अभी भी जस का तस है। आज पांडे जी के लड़के बुड्ढे होने को आये मगर शर्मा जी के लड़के अभी जवान हैं और उनका मौहल्ले में दबदबा भी है। आज शर्मा जी की बढ़ती पूंजी, जायदाद और ताकत देख कर पांडे जी भी दंग हैं।

एक दिन वो खुद चलकर शर्मा ही के घर आये, खाना भी खाया और सम्मान भी पाया मगर जमीन के मसले की कोई बात नहीं की।

अब खाना खाया तो खिलाना भी पड़ेगा, ऐसा सोचकर उन्होंने शर्मा जी कओ अपने घर बुलाया। शर्मा जी खूब आवभगत करी और खाना भी खिलाया मगर पांडे ने साफ़ कह दिया कि आपके घर का गुसलखाना और कमर मेरे हिस्से की जमीन पर बना है, आप कुछ ले देकर मामला निपटाओ।
अब शर्मा जी के बेटे चिल्ला रहे हैं कि जब पांडे ने ऐसा कहा तो आपने उसकी जबान क्यों नहीं छीन ली।
अब बेटों को कौन समझाए कि 20 साल पुराने जमीन के मसले एक बैठक में नहीं सुलझ सकते। इसके लिए शर्मा जी को पांडे के अनय 3 पड़ोसियों को भी साथ लेना होगा जिनसे पांडे के जमीन के अनसुलझे मसले हैं। एकत्रित होकर दबाव बनाना होगा, साम-दाम-दंड-भेद से काम लेना होगा। अभी तो साम-दाम का दौर चल रहा है जल्द ही भेद और फिर दंड का मसला शुरू होगा।
थोडा सब्र रखो।

जमीन का मसला  20 साल का हो या 70 साल का एक झटके में नहीं सुलझता। यही  मैं उन लोगों से कहना चाहता हूँ जो भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चीन यात्रा पर सवाल खड़ा कर रहे हैं| जो सवाल पाकिस्तान और बाकि दुश्मन देशों को खड़े करने चाहिए वो अपने देशवासी ही खड़े कर रहे हैं|

टिपण्णी

Loading Facebook Comments ...
Loading Disqus Comments ...

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

 

No Trackbacks.