किं आश्चर्यम, किं आश्चर्यम

किं आश्चर्यम, केशव! किं आश्चर्यम?

कल स्वप्न में यक्ष पुनः इस धरा पर आये और आकर गङ्गा तट पर मुझसे प्रश्न करने लगे, किं आश्चर्यम, केशव! किं आश्चर्यम।


मैंने यक्ष का अभिनंदन करने के बाद करबद्ध प्रार्थना करते हुये कहा कि, “इस जीवनकाल में हमने ऐसे नेताओं को प्रधानमंत्री बने देखा जो रिमोट कंट्रोल से चलते थे, यदि रिमोट से नहीं भी चलते थे तो उनकी वाणी-बानी से भय मालूम होता था। लगता था कि कोई देवता सात आकाशों में दूर किसी सात, अश्वमार्ग पर रहकर देश का संचालन करता है जिसकी वाणी 15 अगस्त या 26 जनवरी को ही सुनाई देती है। यह एक साधारण क्रिया थी, लगता था कि ऐसे ही होता रहेगा। अटल काल में ना जनता जागरूक थी ना ही उनको जगाने वाला सोशल मीडिया था।

बरसों बाद देश ने ऐसा प्रधानमंत्री देखा जिस तक पहुंचना सर्व सुलभ है। जो जैसा बोलता है वैसा करता है।

आश्चर्य होता है यह देखकर कि पहले जो मंत्रालय लालफीताशाही के लिये जगप्रसिद्ध थे वो अब ना सिर्फ आम आदमियों से फोन पर सीधे बात करते हैं बल्कि तुरन्त समस्या का निराकरण करते थे।

आश्चर्य होता है कि जो भारतीय रेलवे बदहाल हो रहा था जिसमें किसी भी यात्री को किसी बहुत आम, बहुत ही ज्यादा आम, जिसकी कोई कीमत ना हो, वैसा समझा जाता था वो अब मात्र एक ट्वीट पर बच्चों के लिये दूध, बीमार के लिये डॉक्टर, और बिना ट्वीट के भी अन्य विश्वस्तरीय सुविधायें उपलब्ध करवा रहा है।

आश्चर्य होता है कि जिस IRCTC की वेबसाइट को लोड करना ही बहुत बड़ी बात माना जाता था और उस पर कंफर्म टिकट लेना तो गंगास्नान के जैसा दुर्लभ था, वो आज बहुत तेज गति से काम कर रही है और उस पर बहुत आसानी से टिकट बुक हो रहे हैं।

आश्चर्य होता है कि पहले किसी सीजन में टिकट कन्फर्म होना दुर्लभ होता था परन्तु आज रेलवे सभी को कन्फर्म टिकट किसी भी सीजन में देने की ओर अग्रसर है।

आश्चर्य होता है कि पहले साल में एक बार बजट के समय नई ट्रेन चलने की घोषणा होती थी परन्तु अब बिना बजट के तुरंत नई ट्रेनें चल रही हैं। पहले रेलवे लाइनों के इलेक्ट्रिफिकेशन बहुत दुर्लभ माने जाते थे, अब जहाँ देखों वहाँ रेलवे के लाइनें इलेक्ट्रिक हो रही हैं।

आश्चर्य होता है कि जिन सरकारी और निजी बैंकों में गरीब तबके के लोगों को दूसरी दुनिया का प्राणी मानकर दुर्व्यवहार किया जाता था आज वो उनका फ्री यानि निःशुल्क खाता खोल रहे हैं।

आश्चर्य होता है कि बीमा को सिर्फ मध्यम या अमीर वर्ग के लोगों के लिये दुर्लभ संजीवनी माना जाता था आज वो गरीब के लिये पूर्णतया सुलभ है व बहुत ही सस्ता है। पहले कभी 300 रुपए में जीवन बीमा मिले यह नहीं सुना था परन्तु अब देखा है।

आश्चर्य होता है कि आजादी के इतने सालों के बाद भी 18 हज़ार गांवों तक बिजली नहीं पहुंची थी, आज वहाँ बिजली है। यह बहुत बड़ा आश्चर्य है।

आश्चर्य होता है कि लोग पहले स्वच्छता के लिये बिल्कुल जागरूक नहीं थे। लगता था कि यही नियति है कि हम भारतीय पूर्ण स्वच्छ नहीं बन सकते। आज स्वच्छाग्रहियों को देखकर आश्चर्य मिश्रित गर्व होता है।

मैं स्वयं कांग्रेस काल मे चलने वाली सुलभ शौचालय जैसी योजनाओं के डेटा फीडिंग का कार्य स्वयं की दुकान से करता था। दिखता था कि क्या धांधली हो रही है। आज आश्चर्य हो रहा है कि इस नई सरकार ने 9 लाख से अधिक शौचालय बना दिये हैं और अब भी बनायेगी ताकि राष्ट्र के हर घर मे शौचालय हो।

सूखा हमारे लिये कोई नई खबर नहीं थी, पर आश्चर्य तब हुआ जब देखा कि पानी की ट्रेन इस देश मे चली और प्यासे लातूर को पानी मिला। जल अभी तक बादलों से बरसते तो देखा था, ट्रेन के डिब्बों से बरसता अभी ही देखा है।

एक गरीब का घरबार सब कैसे बीमारी निगल जाती है, यह सबने देखा था और बहुतों ने सेवार्थ मदद भी की थी। मगर किसी ने यह आश्चर्य ना सोचा था कि देश के 50 करोड़ लोगों को निःशुल्क स्वास्थ्य बीमा योजना इतनी तेजी से मिलेगी और वो इसका लाभ भी लेने लगेंगे। पहले की सरकार होती थी यह योजना कागजों में बनाने में ही बरसों लगा देती पर घोर आश्चर्य है कि यह इतनी जल्दी लागू भी हो गयी। इसके साथ यह भी आश्चर्यचकित कर गया कि एक बार लिखने मात्र से प्रधानमंत्री की तरफ से हज़ारों को इलाज के लिये धन की सहायता मिली।

पहले बड़े सरकारी हस्पतालों के चक्कर लगाकर ही कभी साल-दो साल में दिखाने का नम्बर लगता था, परन्तु अब सभी बड़े सरकारी हस्पताल ऑनलाइन अपॉइंटमेंट दे रहे हैं। आश्चर्य नहीं तो और क्या है ये?

चूल्हे से जलती आँखें सबने देखीं थीं पर उन गरीबों के लिये सिलिंडर की व्यवस्था कैसे छप कोई न सोचता था? सोचते भी कैसे, घोटाले से फुर्सत मिले तो? आश्चर्य होता है कि प्रधानमंत्री ने एक बार आह्वान क्या किया लाखों लोगों ने गैस सब्सिडी छोड़ दी और सरकार ने वो सारा पैसा अकिंचनों को बिना जाति-धर्म के भेदभाव के निःशुल्क गैस सिलिंडर देने में लगा दिया।

एक LED जो 300 से 400 रुपये में बिकता था आज आश्चर्य है कि वही कम्पनी का LED 40 से 50 रुपये में मिल रहा है। गाँव के गाँव बड़े बल्ब और CFL छोड़कर LED पर आ गये।

2014 से पहले भारत हॉलीवुड की फ़िल्मों से पूर्णतया गायब रहता था। वो लोग हमारी पूरी तरह से उपेक्षा करते थे। आश्चर्य होता है कि आज वो भारत को प्राथमिकता दे रहे हैं। अरे पैसा तो वो हमसे पहले भी कमाते थे, अब क्या बदला?

पहले विदेश में किसी भारतीय की दुर्गति हो जाये तो उसे भगवान भरोसे छोड़ा माना जाता था क्योंकि भारत सरकार उसकी मदद करेगी कोई सोच भी नहीं सकता था। किसी भारतीय की मृत्यु यदि विदेश में हो जाती थी तो उसका शव भारत ला पाना दुर्गम माना जाता था। आज आश्चर्य है कि एक ट्वीट पर ही विदेश में रह रहे भारतीय को सभी सुविधायें मिल जाती हैं। भारतीय है तो कहीं भी रहे, कभी अकेला नहीं रहेगा सरकार उसके साथ है। इराक के युद्ध हो या यमन का, भारतीय तो भारतीय हमारी सरकार ने अन्य देशों के लोगों को भी रेस्क्यू किया।

पाकिस्तान की तरफ शांति में बढ़ता हाथ और पाकिस्तान से होते हमले हम सबने देखे थे। पर जब पाकिस्तान में और उसके कब्जाये हुये हमारे कश्मीर में हमने सर्जिकल स्ट्राइक्स और एयर स्ट्राइक होती देखी तो दांतों तले उँगली दबा ली। म्यंमार में रह रहे आतंकी शिविर के बारे में जानते तो सब थे, पर वहाँ एक नहीं दो-दो बार सर्जकिल स्ट्राइक्स का आश्चर्य पहली बार ही देखने को मिला।

पहले आतंकी हमलों के बाद देश को कोई उम्मीद नहीं होती थी कि कुछ बदलेगा। पर अब आतंकी हमलों से पहले और उसके बाद सरकार कार्यवाही करेगी हो करेगी आज ऐसा विश्वास सबको है।

पहले सभी किसानों को यूरिया सुलभ ही नहीं होता था, इसको लेने के लिये लगने वाली लाइनों में झगड़े आम बात होती थी। आश्चर्य होता है कि आज मुँहमाँगा यूरिया प्रत्येक किसान को मिल रहा है क्योंकि अब नीम कोटिंग से उसकी ब्लैक मार्केटिंग बंद हो गयी।

पहले देश का प्रधानमंत्री कहता था कि हम 100 रुपये भेजते हैं तो गरीब को 10 ही मिलते हैं। आज सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से 100 भेजती है तो गरीब को 100 ही मिलते हैं और बैंक उस पर 4 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देता है वो अलग। जो कहते हैं कि ये योजना हम लाये थे, तो उनसे पूछो कि इस योजना के क्रियान्वयन के लिये क्या उन्होंने सबके एकाउंट्स खोलने और हर योजना में आधार जोड़ने के कदम उठाये थे।

पहले के प्रधानमंत्री लाल किले से हवा हवाई भाषण देते थे जो कभी शत-प्रतिशत पूरे नहीं हुआ करते थे। आज हमने एक ऐसा प्रधानमंत्री देखा है जो जैसा कहता है वैसा रिकॉर्ड टाइम में पूरा करता है।

पहले भारत विदेश नीति में पिछड़ा लगता था। मालूम होता था कि हमारी गिनती टॉप के देशों में है ही नहीं। आज विश्व हमारी बदली विदेश नीति को देखकर आश्चर्य व्यक्त करता है।

आश्चर्य होता है कि अब हमारा भारत अंतरिक्ष मे अमेरिका व रूस जैसे देशों के एकाधिकार को चुनौती दे रहा है। चन्द्रयान से लेकर मंगलयान तक और गगनयान से लेकर LEO में एक सॅटॅलाइट को मार गिराने में भारत ने अंतरिक्ष में बड़े कदम भरे हैं।

आश्चर्य होता है कि पंगु होता DRDO, इंडियन पोस्ट ऑफिस और MTNL आज अपने पैरों पर दौड़ रहे हैं और नये कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं।

आश्चर्य होता है कि असम्भव माने जाने वाला OROP जो खुद एक राजपरिवार ने हटाया और उसके वंशज उसको लाने की बातें करते थे, वह आज एक हकीकत है।

आज़ादी के बाद से भारत का पूर्वी पाकिस्तान और बाद में बने बंगलादेश से सीमा मुद्दा लटका पड़ा रहा। तथाकथित नेहरूवियनों में इसव सुलझाने का माद्दा नहीं था। इसके कारण गैरकानूनी रूप से अवैध बंगलादेशी भारत मे घुस रहे थे। पता नहीं लगता था कि कौन सा टुकड़ा किस देश का है? अब वह मुद्दा सुलझ गया है, यह किसी आश्चर्य से कम नहीं है।

चीन स्ट्रिंग्स ऑफ पर्ल्स की योजना के साथ भारत की घेराबंदी कर रहा था, सबको लगता था कि भारत तो अब गियो। फिर आयी मोदी सरकार, जिसने चीन की चाल का जवाब उसी की भाषा मे देना आरम्भ किया। सेशेल्स, मॉरीशस और अन्य द्वीपों में नेवी बेस बनाये गये। जब चीन वन बेल्ट परियोजना लाया तो भारत ने उसका जवाब चाबहार पोर्ट लेकर दिया।

हमें लगता था कि पाकिस्तान हमले करवाता रहेगा मगर हम उससे सामान इम्पोर्ट करते रहेंगे, उसको पानी देते रहेंगे। पर आश्चर्य है कि अब सब बदला है। ना हम पाकिस्तान को पानी दे रहे हैं ना ही उससे सामान मंगवा रहे हैं।

पहले हिन्दू को सब दबा-कुचला समझते थे। कांग्रेस तक Community Protection Bill ला रही थी, जिसका प्रत्यक्ष नुकसान हिंदुओं का होता, दंगे तथाकथित अल्पसंख्यक करते और गिरफ्तारी हिंदुओं की होती।

आश्चर्य होता है कि अब हिंदुओं का स्वाभिमान एक बार पुनः जाग रहा है। आज उन्हें हिन्दू कहलाने में शर्म नहीं, बल्कि गर्व महसूस होता है। मोदी सरकार ने ऐसा कानून बनाया है कि यदि कोई हिन्दू है और वो किसी भी देश मे रहता है तो उसको भारत की नागरिकता मिल सकती है। 5 साल पहले तक यह असम्भव लगता था।

अर्द्धकुंभ हो या पूर्ण कुम्भ, सबको लगता था कि वहाँ बच्चे क्या बड़े भी बिछुड़ कर गुम हो जाते हैं। यह देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि साढ़े तीन से चार करोड़ लोगों ने कुम्भ स्नान किया वो भी बिना किसी असुविधा के। 45000 बच्चों को GPS वाले RFID टैग लगाये गये थे ताकि उनको हर समय प्रशासन ट्रैक कर सके।

ईमानदारी से आयकर व अन्य तरह के कर भरने वालों को लोग बेवकूफ समझते थे। काले धन कमाने वाले मौज करते थे। लोग नोटों के बिस्तर बनाते थे, अपने बैग तो क्या अपने बैंक लॉकर्स में भी नोट ही नोट भरते थे। फिर आया मोदी का डंडा। 8 सितम्बर की रात 12 बजे से 500 और 1000 के नोट लीगल टेंडर नहीं होंगे। हाँ आम जनता को तकलीफ हुई, हमारे मध्य के कुछ लोग मरे भी जिनका हमें बहुत दुःख है। परन्तु यह बलिदान जाया नहीं गया, काला बाजारियों में जबरदस्त चोट पड़ी। कुछ ही महीनों में टैक्स पेयर्स की संख्या दोगुनी हो गयी।

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