चरखा और नरेन्द्र मोदी

ढाका की मलमल के बारे में आप सभी ने सुना होगा | कहते हैं कि आप ढाका की मलमल वाली चादर को एक अंगूठी से निकाल सकते थे | इतनी बारीक़ और महीन होती थी ये | यही कहानिया कमोबेश भारत के हर हिस्से की हैं | हमने एसा लोहा बनाया जिसपे हजारों सालों से जंग नहीं लगी | पर ये सब हवा में नहीं हुआ | इसे करने में हमारे पूर्वजों की दिन रात की मेहनत और ज्ञान था | पढ़ना जारी रखे चरखा और नरेन्द्र मोदी

राष्ट्र गाँधी को सुन समझ न सका

“सुनना तो दूर मुझे तो कोई समझ भी ना सका” – मोहनदास गाँधी

प्यारेलाल लिखते हैं कि अंतिम दिनों में गाँधी कहा करते थे कि मेरी सुनता कौन है? यदि गाँधी जी अपनी इच्छा के अनुसार 125 वर्ष तक जीवित रहते तो अपनी उम्र के 124वें वर्ष में कहते कि सुनना तो दूर कोई समझ भी नहीं सका। पढ़ना जारी रखे राष्ट्र गाँधी को सुन समझ न सका