भारत को आज़ादी नहीं मिली

1930 के दशक में कांग्रेस सिर्फ डोमिनियन स्टेटस चाहती थी और इसी बाबत कांग्रेस का नरम दल सरकार से बात करता था एवं गरम दल को खत्म किया जाता रहा था। सुभाष बाबू ने द्वितीय विश्व युद्ध की भविष्यवाणी 1937 में ही कर दी थी। 1939 में जर्मनी के फ़्रांस पर हमले के वक्त गांधी की इच्छा के विरुद्ध सुभाष बाबू पुनः कांग्रेस के राष्ट्राध्यक्ष बन गए थे और वो देशव्यापी आंदोलन चला संकटग्रस्त इंग्लैंड को दबाना चाहते थे। मगर गाँधी और नेहरू कहते थे कि हमें ब्रिटेन की बर्बादी पर आज़ादी नहीं चाहिए और कोई आंदोलन अभी नहीं होगा। पढ़ना जारी रखे भारत को आज़ादी नहीं मिली

आरएसएस बनाम कांग्रेस

आरएसएस बनाम कांग्रेस का जब मूल्यांकन करते हैं तो पाते हैं कि जहां कांग्रेस की स्थापना अंग्रेजों में एक सेवानिर्वित ए0 ओ0 ह्युम ने जनता में ब्रिटिश सरकार के प्रति सहानुभूति जगाने के लिए करी थी वहीँ आरएसएस की स्थापना डॉक्टर केशव राव बलिराम हेडगेवार ने पूर्णतया राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की विचारधारा को बल देने के लिए करी थी| जहां आरएसएस के लिए वीर विनायक दामोदर सावरकर शीर्ष नेता थे वहीँ कांग्रेस अपनी सारी नाकामियाँ मोहनदस करमचंद गाँधी के पीछे छुपाया करती थी|

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भारतीय स्वतंत्रता के ज्वलंत तथ्य

  1. आज का तीन आयताकार पट्टियों वाले झंडे की रुपरेखा असल में वीर विनायक दामोदर सावरकर और श्यामजी कृष्णा वर्मा ने बनाई थी|
  2. इस झंडे को मैडम भिकाजी कामा, लौह स्त्री, ने स्टुट्गार्ट, जर्मनी में तीसरे अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस सोशलिस्ट कांफ्रेंस में फहराया था|

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